भाकृअनुप - केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान

ISO 9001 : 2008 प्रमाणित संस्थान


Success Story

एक सफल व्यवसाय के लिय बहुपोषक तत्व अहार बट्टिका स्वरोजगार का अच्छा माध्यम है जिसमें कम लागत व समय में अधिक लाभ कमा सकते हैं। काजरी संस्थान की इस तकनीक में विश्वास दिखाते हुये गाजनगढ़ गाँव के कृषक श्री देदाराम पटेल ने 9,800 रूपये के शुरू आती निवेश से पोषक बट्टिका का वाणिज्यिक उत्पादन 2009 में शुरू किया। श्री देदाराम पटेल ने इस व्यवसाय कोजारी रखा और आस-पास के कृषक भाइयों को भी प्रशिक्षित किया और इस की महत्ता इतनी बन गयी कि इस किसान कों राज्य सरकार ने 2014 में उत्कृष्ट प्रगतिशील किसान का पुरस्कार प्रदान किया। आज श्री देदाराम पटेल पाली जिले का एक प्रगतिशील कृषक माना जाता है जो लगातार कृषकों को स्वरोजगार के लिये ग्रामीण स्तर पर ही प्रशिक्षित करता रहता है।वर्तमान में श्री देदाराम पटेल जिले में लगभग 33 युवा कृषकों को प्रशिक्षित कर चुके हैं जो अपना व्यवसाय गांव व ढाणियों में चला रहे हैं।

Success Story
यह बट्टि का मारवाड़ क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध हो गयी है और इसकी काफी मांग है। वर्तमान में श्री पटेल ने इस उद्यम को राज्य सरकार से पंजीकृत करवा लिया है और खुद व परिवार के अन्य सदस्यों के लिये रोजगार सृजन करते हुए सफलता पूर्वक लगभग 25,000 रूपये मासिक आय प्राप्त कर रहे हैं। श्री देदाराम वैज्ञानिक विधि से उन्नत किस्मों का प्रयोग करते हुए खेती करते हैं और हर फसल की बम्पर पैदावार लेते हैं। इन की सफलता को देखने के लिये उच्च अधिकारी व प्रगतिशील किसान दूसरे राज्यों से भी गांव आते हैं। के वि के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में श्री देदाराम जी नियमित रूप से पशु आहार बट्टिका एवं दाना बनाने का प्रायोगिक प्रशिक्षण देते हैं तथा उप महानिदेशक, शिक्षा, भाकृअनुप, नई दिल्ली, निदेशक, सी.एस.डब्ल्यू.आर.आई. अविकानगर, निदेशक, काजरी, जोधपुर, उप महानिदेशक, एन.आर.एम., कुलपति, पषु चिकित्सा विश्वविद्यालय, बीकानेर आदि श्री पटेल के गांव में आकर उनको सफलता की बधाईयाँ दे चुके हैं।



* “शुष्क क्षेत्र विकास एवं शुष्क क्षेत्र को बंजर से हरित बनाना” विषय पर 13वीं अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी 11-14 फरवरी, 2019, जोधपुर, भारत     

समाचार / घोषणाएँ